सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 32 और 33 का अनुवादः
तो इस प्रकार अल्लाह तुम्हारा वास्तविक पालनहार है। तो सत्य के पश्चात पथभ्रष्टता और क्या है? तो तुम कहां पलटे जा रहे हो? इस प्रकार अवज्ञाकारियों के बारे में तुम्हारे पालनहार की बात सिद्ध हो गई कि वे ईमान लाने वाले नहीं हैं।
संक्षिप्त टिप्पणी:
जब ईश्वर सत्य है तो फिर ये मूर्तियां और अन्य वस्तुएं जिन्हें तुम उसके समकक्ष ठहराते हो सत्य नहीं हो सकती हैं और जो लोग द्वेष, हठधर्मी एवं उद्दंडता के कारण सत्य से मुंह मोड़ लें उन्हें ईमान तथा मार्गदर्शन प्राप्त नहीं होता।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
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सत्य और असत्य के बीच कोई तीसरा मार्ग नहीं है जो सत्य नहीं होगा व असत्य है, अतः सत्य और असत्य के टकराव में निष्पक्ष नहीं रहा जा सकता।
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मनुष्य पाप व उद्दंडता के मार्ग का चयन करके ईमान की ओर अपने झुकाव का मार्ग बंद कर देता है।